देवउठनी एकादशी आज: सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास जलाएं दीपक और तुलसी के आठ नाम वाले मंत्र का जप करें

शुक्रवार, 4 नवंबर को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। मान्यता है कि इस तिथि पर भगवान विष्णु विश्राम से जागते हैं और सृष्टि का भार संभालते हैं। इसे देवउठनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन तुलसी का विवाह शालिग्राम जी से कराया जाता है। देवउठनी एकादशी से सभी तरह के मांगलिक कामों के लिए शुभ मुहूर्त शुरू हो जाएंगे।

ज्योतिषाचार्य पं. विशाल कौशिक के मुताबिक इस तिथि पर तुलसी और शालिग्राम का विवाह कराने की परंपरा पुराने समय से चली आ रही है। शालिग्राम जी को विष्णु जी का स्वरूप माना जाता है।

तुलसी का विवाह हुआ था शंखचूड़ असुर से

कथा प्रचलित है कि पुराने समय में तुलसी का विवाह शंखचूड़ नाम के असुर से हुआ था। शंखचूड़ देवताओं के लिए परेशानी बन गया था। सभी देवता उसे पराजित नहीं कर पा रहे थे। सभी देवताओं ने शिव जी से शंखचूड़ का आतंक खत्म करने के लिए प्रार्थना की। इसके बाद शिव जी और शंखचूड़ का युद्ध शुरू हो गया। बहुत कोशिशों के बाद भी शिव जी असुर का अंत नहीं कर पा रहे थे, क्योंकि उसके साथ तुलसी के सतीत्व की शक्ति थी।

उस समय भगवान विष्णु ने छल से देवी तुलसी का सतित्व भंग कर दिया था, इसके बाद तुलसी के पति शंखचूड़ का वध शिव जी ने कर दिया। जब ये बात तुलसी को मालूम हुई तो उसने विष्णु जी को पत्थर होने का शाप दे दिया। विष्णु जी ने ये शाप स्वीकार किया और तुलसी को पूजनीय होने का वर दिया था। इसके बाद से विष्णु जी के पत्थर स्वरूप शालिग्राम जी के साथ पूजा करने की परंपरा शुरू हुई।

देवउठनी एकादशी पर ऐसे करें तुलसी पूजा

देवउठनी एकादशी पर सुबह जल्दी उठें और घर की, तुलसी के आसपास साफ-सफाई करें। स्नान के बाद तुलसी को जल चढ़ाएं। हल्दी, दूध, कुंकुम, चावल, भोग, चुनरी आदि पूजन सामग्री चढ़ाएं। सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास दीपक जलाएं। कर्पूर जलाकर आरती करें। अगर इस दिन तुलसी और शालिग्राम का विवाह नहीं करवा पा रहे हैं तो तुलसी की सामान्य पूजा करें। घर में सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए तुलसी देवी से प्रार्थना करें। तुलसी नामाष्टक का पाठ करें। तुलसी नामाष्टक यानी तुलसी के आठ नाम वाले मंत्र का जप करें।

ये है तुलसी का मंत्र –

वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी। पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।

एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम। यः पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।

 

संपादन…. मीनाक्षी सिंह