हरितालिका व्रत:जीवन साथी के सौभाग्य के लिए महिलाएं करती हैं ये व्रत, देवी पार्वती के साथ ही शिव जी और गणेश जी की भी पूजा जरूर करें

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गुरुवार, 9 सितंबर को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया है, इसे हरितालिका तीज कहा जाता है। महिलाएं तीज का ये व्रत अपने जीवन साथी की अच्छी सेहत, लंबी उम्र, सुखी जीवन और सफलता के लिए करती हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार हरितालिका व्रत के दिन देवी पार्वती के साथ ही गणेश जी, शिव जी, कार्तिकेय स्वामी की भी विशेष पूजा करनी चाहिए।

ये है हरितालिका व्रत से जुड़ी मान्यता

पुराने समय देवी पार्वती ने शिव जी को पति रूप में पाने के लिए हरितालिका का व्रत किया था। व्रत और तप के प्रभाव से शिव जी प्रसन्न हो गए। इसके बाद शिव-पार्वती का विवाह हुआ था। हरितालिका तीज पर व्रत करने वाली महिलाएं देवी पार्वती की कथा सुनती हैं। कथा में पार्वती के त्याग, संयम, धैर्य और पतिव्रत धर्म की महिमा बताई गई है। ये कथा सुनने से महिलाओं का पुण्य, मनोबल बढ़ता है और उनकी समस्याएं खत्म होती हैं।

ये है देवी पार्वती से जुड़ी संक्षिप्त कथा

प्रजापति दक्ष की पुत्री सती ने शिव जी के अपमान से दुखी होकर पिता के यज्ञ कुंड में कूदकर प्राण त्याग दिए थे। इसके बाद देवी ने मैना और हिमवान के यहां पुत्री के रूप में अवतार लिया। देवी पार्वती ने शिव जी को पति रूप में पाने के लिए निराहार रहकर कठोर तप किया था। तप से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया था। इसके बाद हिमावान और मैना ने शिव-पार्वती का विवाह करवाया।

तीज पर महिलाएं करती हैं ये शुभ काम

जो महिलाएं ये व्रत करती हैं, वे निराहार रहती हैं। कुछ महिलाएं ये व्रत निर्जल रहकर करती हैं। व्रत के दूसरे दिन सुबह स्नान के बाद पूजा की जाती है। पूजन के बाद ही महिलाएं अन्न और जल ग्रहण करती हैं। इस व्रत में महिलाएं किसी शिव मंदिर में शिवलिंग के सामने बैठकर गणेशजी, शिवजी और माता पार्वती की पूजा करती हैं। पूजा में देवी मंत्र का जाप 108 बार करना चाहिए।

मंत्र- गौरी मे प्रीयतां नित्यं अघनाशाय मंगला। सौभाग्यायास्तु ललिता भवानी सर्वसिद्धये।।

अर्थ – गौरी नित्य मुझ पर प्रसन्न रहें, मंगला मेरे पापों का नाश करें। ललिता मुझे सौभाग्य प्रदान करें और भवानी मुझे सब सिद्धियां प्रदान करें।

देवी पार्वती को चढ़ानी चाहिए ये चीजें

माता पार्वती के लिए सुहाग का सामान जैसे लाल चूड़ियां, लाल चुनरी, कुमकुम आदि चीजें मंदिर में अर्पित करनी चाहिए। किसी जरूरतमंद सुहागिन को ये चीजें दान भी करनी चाहिए। इस दिन घर में भी भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय स्वामी और गणेश जी की पूजा करनी चाहिए। घर के मंदिर को फूलों से सजाएं। एक चौकी पर केले के पत्ते रखकर शिवजी, पार्वती और गणेशजी की प्रतिमा या फोटो स्थापित करें। देवी-देवताओं का आह्वान करें। विधिवत पूजन करें। सुहाग का सामान देवी मां को चढ़ाएं।

जो महिलाएं अस्वस्थ हैं या गर्भवती हैं, उन्हें इस व्रत के संबंध में सावधानी रखनी चाहिए। खान-पान का विशेष ध्यान रखें। भूखे रहने से परेशानियां बढ़ सकती हैं। ऐसी स्थिति में महिलाओं को अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए ये व्रत करना चाहिए।