बृहस्पति का राशि परिवर्तन:मकर राशि में गुरु-शनि होने से धार्मिक विवाद, लैंडस्लाइड और बड़ी हस्ती के निधन की आशंका

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गुरु-शनि के कारण धर्म स्थान से जुड़ी दुर्घटना और शिक्षा को लेकर विवाद के योग हैं, बीमारियों का संक्रमण बढ़ने का भी अंदेशा है

14 सितंबर यानी आज बृहस्पति राशि बदल रहा है। ये ग्रह अब कुंभ को छोड़कर मकर राशि में आ जाएगा। खास बात यह है कि गुरु वक्री यानी टेढ़ी चाल से चलते हुए आगे की बजाए एक राशि पीछे की ओर आ रहा है। इसके बाद 18 अक्टूबर को मकर राशि में मार्गी यानी सीधी चाल से चलने लगेगा। फिर 21 नवंबर को मकर से आगे निकलकर कुंभ राशि में आएगा। इसका शुभ-अशुभ असर देश-दुनिया के साथ 12 राशियों पर भी पड़ेगा।

धर्म, ज्ञान और शिक्षा का ग्रह
ज्योतिष में गुरु को ज्ञान, शिक्षा, धन वृद्धि और धार्मिक कार्य का कारक माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन व्यक्तियों पर बृहस्पति ग्रह की कृपा और आशीर्वाद रहता है उस व्यक्ति के गुणों में सात्विक विचार का संचार होता है। बृहस्पति के कारण धार्मिक मामलों से जुड़े बड़े बदलाव होते हैं। वक्री बृहस्पति की जब राहु के साथ दृष्टि संबंध स्थापित होता है तो कई तरह की समस्याएं आती हैं।

इस तरह रहेगी ग्रह स्थिति
पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र बताते हैं कि बृहस्पति वक्री होकर शनि की राशि यानी मकर में रहेगा। यहां पहले से ही शनि भी वक्री है। जिससे गुरु और शनि की युति बन जाएगी। जिससे इन दोनों ग्रहों पर अब राहु की पूरी दृष्टि रहेगी। वहीं, अक्टूबर के आखिरी में इन ग्रहों पर मंगल की भी दृष्टि पड़ेगी। ग्रहों की ये स्थिति देश-दुनिया के लिए ठीक नहीं रहेगी।

तेज बारिश और दुर्घटना की आशंका
बृहस्पति की चाल में बदलाव होने से देश के कुछ हिस्सों में तेज बारिश की होने के योग बन रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था से स्टूडेंट्स और पेरेंट्स में असंतोष की स्थिति रहेगी। धार्मिक विवाद बढ़ सकते हैं। किसी धर्म स्थान से जुड़ी दुर्घटना की भी आशंका बन रही है। पहाड़ी इलाको में लैंड स्लाइड होने का अंदेशा है। जिससे आवाजाही में रुकावटें बढ़ेंगी। साथ ही किसी बड़े नेता के निधन की खबर भी मिल सकती है।

5 राशियों के लिए शुभ
डॉ. मिश्र बताते हैं कि बृहस्पति के वक्री होकर मकर राशि में आ जाने से वृष, कर्क, कन्या, धनु और मीन राशि वाले लोगों के लिए अच्छा समय रहेगा। इन पांच राशि वाले लोगों को नौकरी और बिजनेस में सफलता मिलने के योग बनेंगे। इनकी सेहत में भी सुधार होगा। नई योजनाएं बनेंगी और उन पर काम भी शुरू होगा। किस्मत का साथ मिलेगा। धन लाभ होने के भी योग बनेंगे। इनके अलावा अन्य राशि वाले लोगों को बड़े फैसले सावधानी से लेने होंगे। लेन-देन और निवेश संभलकर करना होगा। जोखिम भरे कामों से बचना होगा। साथ ही सेहत संबंधी लापरवाही न करें।

अभी वक्री, 18 अक्टूबर से होंगे मार्गी
बृहस्पति ग्रह की वक्री यानी टेढ़ी चाल को अशुभ फल देने वाला माना जाता है। क्योंकि ये ग्रह इस अवस्था में पीड़ित माना जाता है। बृहस्पति 18 सितंबर को मार्गी होगा यानि सीधी चाल से चलने लगेगा। इसके बाद 21 नवंबर को फिर राशि बदलकर कुंभ में चला जाएगा। जिससे शनि के साथ बनने वाली युति खत्म हो जाएगी।

बृहस्पति देव की पूजन विधि
देवगुरु बृहस्पति की पूजा हमेशा शुक्लपक्ष में बृहस्पतिवार से करनी चाहिए। चूंकि इस वक्त भाद्रपद महीने का शुक्लपक्ष चल रहा है। ऐसे में उनकी पूजा और व्रत के लिए ये शुभ समय है। बृहस्पतिवार को अपने हाथों में पीले फूल लेकर बृहस्पति देवता का आवाहन करें। साथ ही बृहस्पति देवता के मंत्र, बीज मंत्र, बृहस्पति गायत्री एवं बृहस्पति स्तोत्र का पाठ करें। इससे गुरु के अशुभ असर में कमी आएगी।

गुरु का राशि परिवर्तन जिन्हें अशुभ हो वह शांति के लिए उपाय कर सकते है। डॉ. मिश्र बताते हैं कि चने की दाल, हल्दी, केला, पीला वस्त्र, धार्मिक पुस्तकें दान करें। भगवान विष्णु या केले की पूजा अर्चना करें। केले की जड़ या पुखराज रत्न धारण करें। बुजुर्गों, साधु संतों व ब्राह्मणों का सम्मान करें। इन उपायों से राशि का अशुभ प्रभाव कम किया जा सकता है।