व्रत-उपवास:पितृ पक्ष, शुक्रवार और चतुर्थी का योग 24 को; गणेश जी के साथ ही देवी लक्ष्मी की पूजा जरूर करें

Spread the love

शुक्रवार, 24 सितंबर को अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी है। इस तिथि पर गणेश जी के लिए व्रत-उपवास किया जाता है। अभी पितृ पक्ष चल रहा है। ऐसे में पितृ पक्ष, शुक्रवार और चतुर्थी का योग शुभ फल देने वाला है। इस योग में गणेश जी के साथ ही देवी लक्ष्मी की भी पूजा जरूर करनी चाहिए। देव पूजन के बाद दोपहर में पितरों के धूप-ध्यान करना चाहिए।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार पितृ पक्ष में परिवार के मृत सदस्यों के नाम पर धूप-ध्यान करना चाहिए। इसके लिए पितरों का ध्यान करते हुए दोपहर में जलते हुए कंडों के अंगारों पर गुड़-घी अर्पित करना चाहिए। धूप देने के बाद हथेली में जल लेकर अंगूठे की ओर से पितरों को जल अर्पित करें। ऐसा करने से पितरों को तृप्ति मिलती है।

अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर गणेश के लिए व्रत करना चाहिए। शुक्रवार को सुबह जल्दी उठें और घर के मंदिर में गणेश के सामने व्रत करने का संकल्प लें। पूजा करें। दिनभर निराहार रहें, अगर ये संभव न हो तो फलाहार कर सकते हैं। शुक्रवार को देवी लक्ष्मी के लिए विशेष पूजा-पाठ करने की परंपरा है। गणेश जी के साथ ही लक्ष्मी पूजन भी जरूर करें। दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिश्रित दूध भरें और देवी का अभिषेक करें। देवी मां श्रृंगार करें। सुहाग का सामान जैसे लाल वस्त्र, कुमकुम, चूड़ियां आदि चढ़ाएं। पुष्प हार अर्पित करें और मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। पूजा के अंत देवी से जानी-अनजानी भूल के क्षमा याचना करें। पूजा के बाद प्रसाद बांटें और खुद भी ग्रहण करें।

पितृ पक्ष, चतुर्थी और शुक्रवार के योग में पूजा-पाठ और श्राद्ध कर्म के साथ ही दान-पुण्य भी जरूर करें। जरूरतमंद लोगों को धन और अनाज का दान करें। किसी मंदिर में पूजन सामग्री भेंट करें। गौशाला में गायों की देखभाल के लिए धन और हरी घास दान करें। छोटे बच्चों को पढ़ाई से जुड़ी चीजें दान करें।